सफलता का आनंद उठायें / Enjoy the success

तीन बिन्दुओं पर बात करता हूँ । पहला “सफलता के कदम का बोध” , दूसरा “संतुष्टि की वास्तविक अनुभूति” और तीसरा बिन्दु है “खुश रहने की कलाउक्त तीनों को क्रम से समझना- सीखना होगा।

Let me talk about three points. The first is “realization of the steps to success”, the second is “actual feeling of satisfaction” and the third point is “the art of being happy”. The above three will have to be understood and learned in sequence.

 

1.    सफलता के कदम का बोध / Understanding the steps to success -

असफलता का चिन्ह

असफलता के भय से मुक्ति ही सफलता के कदम का बोध है । यदि कोई अपनी मंजिल प्राप्त कर ले और फिर भी यह सोच के भयभीत हो कि पता नहीं आगे क्या होगा । आने वाले कल के लिए वह सजग होने के बजाय डरा और अनिश्चित दिखे । यह ठीक नहीं ।

असफल होने का चिन्ह , फेल की मोहर को सिरे से नकारें । ये मूल्यांकन और मापदंड मानव निर्मित है और प्रतिभागियों की संख्या तथा अन्य परिस्थितियों के अनुसार रचित है । इसकी मान्यता का दायरा है । इसलिए यह भय कर दे , इतनी इस फेल की ताकत नहीं है । पीछे देखें कई उदाहरण हैं कि संस्थाओं ने जिसे नकार दिया वही शख्स संस्थाओं के उच्च पद पर आसीन हुआ । यदि आपने सफलता प्राप्त की है तो इसका बोध सार्वजनिक करें । उत्सव मनाएँ ..........

 

 2.  संतुष्टि की वास्तविक अनुभूति / Real feeling of satisfaction

 

संतुष्टि / Satisfaction

आज की सफलता पिछले दिनों के प्रयास का फल है । इसे महसूस करें , इसका मूल्यांकन करे और इस सफलता के लिए अपने गौरव की अनुभूति खुद में पैदा करें । एवरेस्ट को फतह करने वाला भी यह सोच सकता है कि जितनी ऊंचाई तक वह गया है आने वाले वर्षों में कोई दूसरा पर्वतारोही उससे ज्यादा की ऊंचाई पर निश्चित रूप से होगा क्यों कि एवरेस्ट प्रति दिन कुछ ऊंचा होता चला जा रहा है । यह तथ्य उसे असंतुष्ट कर सकता है । लेकिन बावजूद इसके वह इस सच को नकार कर अपनी सफलता से संतुष्ट रहता है । हमें अपनी कामयाबी को स्तर दर स्तर महसूस करना चाहिए और इस अनुभव का संग्रह अगले कदमों के लिए सुरक्षित भी रखना चाहिए ।

संतुष्टि की वास्तविक अनुभूति को अपनी टेबल पर सजा कर प्रदर्शित करें , यह कोई तस्वीर , मेडल या कोई प्रमाणपत्र आदि कुछ भी स्मृति चिन्ह हो सकता है । इसे देखते रहने से ही आप खुद को ऊर्जावान महसूस करेंगे ..........

 

1.    3.खुश रहने की कला / The Art of Being Happy

खुशी / Happiness



खुश रहने की कला यानि स्वयं में संतोष युक्त रहना यानि हर स्थित में प्रशन्न रहना । परिस्थितियों को प्रतिकूल होने पर भी सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना । यदि उक्त सभी बातें हम दिल में रखें और इसी के अनुकूल आचरण और अभ्यास रखें तो समझिए कि आपको खुश रहने की कला आती है । एक उदाहरण देता हूँ , काँच के गिलास में पानी आधा भरा है या काँच का गिलास पानी से आधा खाली है । यह एक ही बात है जहां आधा भरा है सकारात्मक और आशावान दृष्टिकोण है वहीं आधा खाली इसके उलट नकारात्मक और निराशा प्रदर्शित करने वाला दृष्टिकोण है । हमें सोचने की प्रक्रिया को सहज और सकारात्मक करने का अभ्यास करना चाहिए । यही खुश रहने की कला है । सफलता और असफलता हर इंसान की ज़िंदगी का जरूरी पड़ाव है । यह रास्ते का दृश्य है खुद को इससे प्रभावित नहीं करना है और न ही इसके अंदर कैद हो जाना है । एक बात जो अभ्यास और ध्यान चिंतन से प्राप्त है , वह है संलिप्तता के साथ निर्लिप्तता यानि आप दृश्य में अपनी भूमिका भी निभा रहे हैं और खुद ही दर्शक हैं और शांत मन से घटना को होने भी दे रहे हैं । यह अभ्यास खुशी को स्थायी बनाता है ।

 

4.उपसंहार / Epilogue -

एक बार अकबर ने बीरबल से कुछ ऐसा लिखने को कहा जिसे खुशी में पढ़ो तो गम हो और गम में पढ़ो तो खुशी हो , तब बीरबल ने लिखा – “ये वक़्त भी गुजर जाएगा” । इसका सीधा अर्थ है जैसा हम विचार करते हैं वही हमें दिखता है ।  

Once Akbar asked Birbal to write something which if read in happiness would bring sadness and if read in sadness would bring happiness, then Birbal wrote – “This time too will pass”. It simply means that what we think is what we see. ....

 

सकारात्मक सोच / Positive thinking


बौद्ध विचार में भी बड़ा प्रभावी कोटेशन पढ़ने को मिलता है  The mind is everything what you think , you become…” यानि मस्तिष्क में जो विचार आते हैं आप वैसा ही बन जाते हैं ....

सफलताओं से जुड़ी निश्चिंतताओं और चुनौतियों को आप सहजता से लें , प्रतिद्वंदिता को ईर्ष्या मुक्त कर सहज प्रयास की ओर अपना ध्यान केन्द्रित करें । हर संभव अपनी कुशलता और कौशल को ऊंचाइयों पर रखें । सकारात्मक दृष्टि कोण और सहजता तथा प्रशन्नता का भाव ही आपको कामयाब करेगा इतना आजमाया हुआ सूत्र है ।

A very effective quotation can also be read in Buddhist thought - “The mind is everything what you think, you become…” That is, you become whatever the thoughts come to your mind….

Take the uncertainties and challenges related to success with ease, free your competition from jealousy, and focus your attention on easy effort. Keep your skills and skills at the highest possible heights. A positive attitude and a sense of spontaneity and happiness will only make you successful; this is a tried and tested formula.

-    अवधेश सिंह – कवि लेखक विचारक 






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